बिलासपुर

एक ही राइस मिल में दूसरे पंजीयन के साथ धान का खेल.. पिछले साल का बकाया चावल जमा नहीं कर उसी में ले लिया दूसरा पंजीयन, नए धान को पुराने बकाए में जमा करने का चल रहा काम.. क्या कवर्धा का मुसवा पहुंच गया है बिलासपुर..

बिलासपुर– छत्तीसगढ़ में विगत 15 नवंबर से धान खरीदी का कार्य किया जा रहा है, धान खरीदी के आखिरी सप्ताह में पूरा प्रशासन खरीदी और उठाओ को लेकर मुस्तैद है लेकिन बिलासपुर में भी कवर्धा की तरह धान का मुसवा कांड बाहर आ रहा है लेकिन यह मुसवा धान नहीं खा रहा है बल्कि पिछले साल के धान को जमा करने में लगा हुआ है मजेदार बात यह है कि यह मुसवा इस वर्ष के धान को पिछले वर्ष के बकाए में पहुंचा रहा है, विश्वनीय सूत्रों के मुताबिक बिलासपुर के बिल्हा ब्लॉक के केसला में स्थित एक राइस मिल के संचालक द्वारा 2024-25 में धान की खरीदी की गई थी, लेकिन शासन को कुल खरीदी का कम से कम 50% धान जमा करना था और वह संचालक धान जमा नहीं कर पाया ऐसे में नियमों को मुताबिक उसे इस वर्ष पंजीयन नहीं होना था और हुआ भी वैसा ही,

लेकिन कहावत है न जहां चाह है वहां राह है, उसी कहावत को चरितार्थ करने के लिए राइस मिल संचालक ने दूसरा रास्ता निकाला, और राइस मिल संचालक ने उसी प्रांगण में स्थित कोढ़हा मिल को राइस मिल में तब्दील कर शासन की आंखों में धूल झोंकते हुए विभागीय सेटिंग से दूसरा पंजीयन प्राप्त कर लिया और फिर से धान का उठाव शुरू कर दिया है.. मजेदार बात यह है कि, पिछले वर्ष के बकाया चावल को वह इस वर्ष में लिए धान से पूर्ति करने में जुट गया है ताकि उसे पुराने पंजीयन में धान जमा करने का अधिकार फिर से प्राप्त कर सकें..

बिल्हा के केसला में स्थित मां नारायणी राइस मिल के संचालक को 2024-25 में 97 लॉट चावल जमा करना था लेकिन अब तक उसके द्वारा 41 लॉट जमा किया गया है, ऐसे में उसे इस वर्ष कस्टम मिलिंग के लिए पंजीयन नहीं मिला तो उसने बिना किसी स्टेबलिशमेंट और व्यवस्था के परिसर में स्थित कोढ़हा मिल को राइस बताकर दूसरा पंजीयन प्राप्त कर लिया.. वर्ष 2024-25 में मां नारायणी राइस प्रोडक्ट का पंजीयन क्रमांक 407617001 था जिसके तहत उसे नवंबर से (नए पंजीयन) से पहले कुल मात्रा का कम से कम 50% चावल जमा करना था लेकिन मिलर द्वारा अब तक जमा नहीं किया गया है.. दूसरी मिलर को यह समझ आ गया था कि, उसे इस वर्ष कस्टम मिलिंग का पंजीयन नहीं मिलेगा, तो उन्होंने परिसर में स्थित कोढ़हा मिल को राइस मिल बताकर नया पंजीयन MA403339001 ले लिया गया है, और कस्टम मिलिंग की जा रही है,

अब सवाल उठता है कि, क्या बिना सरकारी सहयोग की इस तरह शासन की आंखों में धूल झोंककर कोई राइस मिल इस तरह का काम कर सकता है, और क्यों विभाग द्वारा जानकारी के बावजूद भौतिक सत्यापन क्यों नहीं किया जा रहा है.. क्या बिलासपुर में भी कवर्धा की तरह मामला उछलने का इंतजार किया जा रहा है..

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